An intricate stone carving showing the three faces of Shiva

About this experience

घारापुरी गुफाएँ

घारापुरी द्वीप, भारत

अनुभव शुरू करें (Opens in new tab)

प्रकाशित: 2024 (v2)

Story outline

  • घारापुरी गुफाएँ

    हिंदू धर्म में भगवान शिव के महत्व को देखते हुए, एलीफेंटा की मुख्य गुफा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल के साथ ही साथ एक पवित्र तीर्थ स्थल के रूप से भी जानी जाती है। गुफा के मंदिर में सोलह मूर्तियां हैं, जिनमें से नौ इसके मुख्य हॉल में हैं, जिनमें से ज्यादातर पहाड़ी की प्राकृतिक चट्टानों से बनी हुई हैं। ये कलाकृतियाँ न सिर्फ परिसर के धार्मिक महत्व को बल्कि इसकी कलात्मक विरासत को भी उजागर करती हैं।
  • Stop 1. गुफा मंदिर की बनावट

    एलीफेंटा द्वीप या घारापुरी (गुफाओं का शहर) मुंबई समुद्र तट से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का साक्षी है। एलिफेंटा में चट्टानों को काटकर बनाए गए गुफा-मंदिर, छठी-आठवीं शताब्दी ई.पू. के बीच प्रचलित चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिर, वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं और उस समय की वास्तुशिल्प की सरलता, इंजीनियरिंग की कुशलता और कलात्मक निपुणता का प्रमाण हैं।
  • Stop 2. सांसारिक से ईश्वरीय की ओर

    मंदिर ब्रह्मांड का प्रतिबिंब होते हैं तथा वे स्थान हैं जो मनुष्य और परमात्मा के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करते हैं - मुक्ति (मोक्ष) की ओर एक आध्यात्मिक यात्रा। उस यात्रा के हर चरण को मंदिर के विभिन्न तत्वों/घटकों द्वारा प्रतीकात्मक रूप से दिखाया गया है।
  • Stop 3. रावणानुग्रह - रावण द्वारा कैलाश पर्वत हिलाना

    हिंदू धर्म में भगवान शिव के निवास स्थान के तौर पर कैलाश पर्वत का बहुत बड़ा महत्व है। माना जाता है कि ब्रह्मांड के पारलौकिक आयाम में आसीन शिव इसके शिखर पर सतत ध्यान की अवस्था में रहते हैं, जिससे ब्रह्मांडीय ऊर्जा उत्पन्न होती रहती है। यह पवित्र पर्वत विश्व की धुरी और स्वर्ग की सीढ़ी का प्रतीक है, जो देवत्व, अमरत्व और ज्ञानोदय के विषयों को मूर्त रूप देता है।
  • Stop 4. सदाशिव - अनन्त शिव

    सदाशिव की बड़ी मूर्ति में सुझाए गए चार चेहरों में से तीन को दिखाया गया है। पीछे की ओर अंतर्निहित चौथा चेहरा और शीर्ष पर पांचवां चेहरा, क्रमशः सद्योजात (शिव के पहले अवतार) और ईशान (शिव के सर्वोच्च अवतार) के रूप में जाने जाते हैं। मूर्तियों पर आप जो भी चेहरा देख सकते हैं, वह शिव के चरित्र के एक अलग पहलू का वर्णन करता है और इसमें विशिष्ट विशेषताएं हैं जो उन गुणों की ओर संकेत करती हैं।
  • Stop 5. गंगाधर - गंगा धारण करने वाले शिव

    गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है, जो शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है। माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान शिव की जटाओं से हुई है, यह स्वर्ग से पृथ्वी पर जीवनदायी जल के अवतरण का प्रतीक है। हिंदू गंगा को केवल एक भौतिक नदी के रूप में नहीं देखते हैं परन्तु एक दिव्य इकाई के रूप में जो आत्मा को शुद्ध करती है, पापों को धो देती है, और मोक्ष, या मुक्ति के मार्ग को सुगम बनाती है।
  • Stop 6. अर्धनारीश्वर - शिव का उभयलिंग रूप

    अर्धनारीश्वर शिव का उभयलिंगी रूप है, जो पूरी तरह से पुरुष और महिला रूपों के विलय को दर्शाता है। यह पूर्ण एकता प्राकृतिक और जागरूक ऊर्जा के मिश्रण का प्रतिनिधित्व करती है, दो अलग-अलग लेकिन पूरक रूप हैं जो संतुलन और सद्भाव लाते हैं।
  • Stop 7. मन्दिर गर्भगृह

    गर्भगृह या आंतरिक गर्भगृह में एक शिवलिंग या शिव अपने लिंगम रूप में प्रतिष्ठापित हैं। आंतरिक गर्भगृह में चार प्रवेश द्वार हैं, प्रत्येक का मुख मुख्य दिशाओं में से एक की ओर है। प्रत्येक प्रवेश द्वार के दोनों ओर द्वारपाल या मंदिर के संरक्षक हैं। ये आठ द्वारपाल अविश्वसनीय रूप से विशाल हैं, और उनकी भव्यता उनके द्वारा पहने जाने वाले आभूषणों से और भी प्रभावशाली हो जाती है।
  • Stop 8. जल भंडारण

    जल संचयन कुंड चट्टान में उकेरी गई बुनियादी खोखली जगहें हैं जिनका उपयोग पानी के टैंक के तौर पर किया जाता था। वे मुख्य रूप से वर्षा जल इकट्ठा करने या कभी-कभी झरनों तक पहुँचने के लिए बनाए गए थे। ये कुंड मानसून के चार महीनों (जून से सितंबर) के दौरान बारिश से भर जाते थे और लोग संग्रहीत पानी का उपयोग बचे हुए वर्ष के लिए कर सकते थे।
  • Stop 9. उपसंहार

    माना जाता है कि शिव सृजन और विनाश दोनों का प्रतीक हैं, जो सार्वभौमिक संतुलन का प्रतीक है। मुख्य गुफा में नक्काशीदार पैनल शिव के जीवन की विभिन्न कहानियों और पहलुओं को दर्शाते हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना संदेश है। एक दूसरे के विपरीत विपरीत थीम वाले पैनल रखना संतुलन की अवधारणा को दर्शाता है।

आवाज़ें

  • A headshot of Dr. Dalal, a man with a full beard and mustache, wearing a blue shirt with a subtle pattern. He is smiling warmly in front of a background filled with bookshelves containing various books and documents.

    डॉ. कुरुश फ़िरोज़ दलाल

    पुरातत्वविज्ञानी

    डॉ. कुरुश फ़िरोज़ दलाल, इन्स्तुकेन ट्रस्ट में पुरातत्व विद्यालय के निदेशक हैं। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास तथा इतिहास में बीए, डेक्कन कॉलेज, पुणे विश्वविद्यालय से पुरातत्व में एमए के साथ-साथ, राजस्थान में प्रारंभिक लौह युग विषय से पीएच.डी. की है। इसके बाद, उन्होंने मुख्य तौर से भारत के पश्चिमी तटों पर प्रारंभिक मध्ययुगीन काल पर ध्यान केंद्रित किया, और संजन, चंदोर और मंडाद की साइटों की खुदाई की। इन खुदाइयों और इससे मिले आंकड़ों का इस क्षेत्र में स्कालर्शिप या विद्वत्ता पर गहरा असर पड़ा है। हाल ही में मंडाद की खुदाई से एक बिल्कुल नए अज्ञात इंडो-रोमन बंदरगाह स्थल का पता चला है, जिसका इतिहास और भी प्राचीन है। डॉ. दलाल सक्रिय रूप से भारत में मेमोरियल स्टोन्स और ऐस-कर्स स्टोन्स पर तथा मुद्राशास्त्र, रक्षा पुरातत्व, वास्तुशिल्प, नृवंशविज्ञान या एथनो-पुरातत्व और संबधित विषयों पर भी काम करते हैं।
  • A headshot of Dr. Baptista, a man with short, dark hair and a trimmed beard, wearing a dark blazer over a plaid shirt. He is smiling confidently with a friendly expression against a plain, light-colored background.

    डॉ. बैपटिस्टा

    पुरातत्वविज्ञानी

    डॉ. बैपटिस्टा प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व के व्याख्याता और सलाहकार हैं। उनकी अनुसंधान रुचियों में एक तरफ प्रागितिहास, मानव-भूमि संबंध, परिदृश्य विकास और दूसरी तरफ औपनिवेशिक इतिहास, शहरी विकास और सामाजिक-सांस्कृतिक स्थलों को आकार देना शामिल है। उन्होंने डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर और अनुसंधान संस्थान, पुणे, भारत से लैंडस्केप और पर्यावरण पुरातत्व में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।
  • A headshot of Dr. Jamkhedkar with short, gray hair and a mustache, wearing a light-colored collared shirt. He is smiling gently, with a warm expression, and is positioned in an indoor setting with a softly blurred background.

    डॉ. अरविंद प्रभाकर जामखेड़कर

    पुरातत्व एवं संग्रहालय के पूर्व निदेशक

    डॉ. अरविंद प्रभाकर जामखेड़कर 2018-2021 तक भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) के अध्यक्ष थे। वह डेक्कन कॉलेज पुणे के चांसलर हैं, जो कि एक डीम्ड यूनिवर्सिटी है। एक संस्थान जहाँ से उन्होंने 1966 में प्राचीन भारतीय संस्कृति में पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने महाराष्ट्र में पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक के तौर पर भी काम किया है। उन्होंने ताम्रपाषाण, महापाषाण और आरंभिक ऐतिहासिक स्थलों की कई खुदाईयों में हिस्सा लिया है। शास्त्रीय और वैदिक संस्कृत, पाली और अर्धमगधी में पारंगत, उनके अनुसंधान रुचियों की विस्तृत श्रृंखला में पुरातत्व, मंदिर वास्तुकला, कला इतिहास, पुरालेख, बौद्ध धर्म और जैन धर्म और बहुत कुछ सम्मिलित है।
  • मीना मुकेश भोईर

    घारापुरी के सरपंच

    मीना मुकेश भोईर, घारापुरी गांव की सरपंच (ग्राम प्रधान) के तौर पर कार्यरत हैं, जिसे एलीफेंटा द्वीप भी कहा जाता है, वह इस द्वीप की मूल निवासी हैं तथा उनका अपने समुदाय और विरासत से गहरा संबंध है। एलीफेंटा में जन्मी और पली-बढ़ी श्रीमति बुई ने द्वीप के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास और इसके प्राकृतिक वातावरण के संरक्षण हेतु अपने विशिष्ट पद का लाभ उठाते हुए अपने समुदाय के विकास और कल्याण हेतु स्वयं को समर्पित कर दिया है।

पार्टनर्स

About the Project

एलीफेंटा गुफा परिसर, मुंबई के पास एक द्वीप पर स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है जो 5वीं से 8वीं शताब्दी का है। हिंदुओं के देवता, भगवान शिव को समर्पित गुफानुमा मंदिरों की यह भूलभुलैया, पत्थरों को तराशने की कला तथा वास्तुशिल्प की एक प्रभावशाली श्रृंखला को दर्शाती है जो प्राचीन भारतीय कलात्मकता के सर्वोच्च शिखर का प्रतीक है। मुख्य गुफा मंदिर, इस परिसर का केंद्रबिंदु है, जिसमें भगवान शिव के व्यक्तित्व के विभिन्न भावों को दर्शातीं उत्कृष्ट मूर्तियां तथा नक्काशियाँ हैं। मुख्य गुफा का 3डी डेटा मई 2023 में CyArk तथा उनके पार्टनर इन्स्तुकेन ट्रस्ट के द्वारा कलेक्ट किया गया था।

सम्बंधित लिंक्स

क्रेडिट

एलीफेंटा गुफा टेपेस्ट्री टूर आयरन माउंटेन के उदार समर्थन से साकार हुआ।
हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (मुंबई मंडल), इंस्टूसेन ट्रस्ट से डॉ. कुरुष दलाल और डॉ. मुग्धा कार्णिक, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय, महाराष्ट्र से डॉ. तेजस गार्गे को उनके अमूल्य योगदान हेतु हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं,। डॉ.
आंद्रे बैपटिस्टा द्वारा स्क्रिप्ट को बहुत विशेषज्ञता से बनाया गया था। प्रोजेक्ट टीम: रिद्धि जोशी, योगिनी आत्रेय, कीनन परेरा और गौरव गमरे।
रिद्धि जोशी द्वारा संगीतमय प्रस्तुति।
अनुवाद-माधुरी जोशी।

Related experience

Cliff Palace (Opens in new tab) — Explore a cliff dwelling and hear from descendent communities